आदि शंकराचार्य
अद्वैत वेदांत की परंपरा में आत्मा और ब्रह्म की एकता के विचार को विशेष महत्त्व दिया जाता है। उनका दार्शनिक कार्य भारतीय चिंतन की प्रमुख धरोहर है।
भारत की संत परंपरा ने भक्ति, विवेक, करुणा और मानवता की सेवा के सूत्र दिए। इन्हीं शिक्षाओं से जीवन को दिशा देने का विनम्र प्रयास।
॥ सत्यम् शिवम् सुन्दरम् ॥यहाँ मूल उद्धरणों के बजाय संतों और मनीषियों की शिक्षाओं का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।
अद्वैत वेदांत की परंपरा में आत्मा और ब्रह्म की एकता के विचार को विशेष महत्त्व दिया जाता है। उनका दार्शनिक कार्य भारतीय चिंतन की प्रमुख धरोहर है।
कबीर की वाणी आडंबर से ऊपर उठकर प्रेम, सहज साधना और मनुष्य की अंतःशुद्धि का संदेश देती है। उनकी रचनाएँ सामाजिक आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती हैं।
रामचरितमानस के माध्यम से तुलसीदास ने मर्यादा, करुणा, कर्तव्य और श्रीराम के आदर्शों को लोकभाषा में व्यापक रूप से पहुँचाया।
स्वामी विवेकानंद ने आत्मविश्वास, चरित्र-निर्माण, आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा पर बल दिया। उनका चिंतन आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
मनुष्य स्वयं अपने मन और प्रयास से अपना उत्थान करे, स्वयं को गिरने न दे।
— श्रीमद्भगवद्गीता 6.5, भावार्थशास्त्रार्थ, सत्संग, दर्शन और प्रेरक जीवन प्रसंगों के माध्यम से प्रामाणिक ज्ञान को सुलभ बनाना हमारा उद्देश्य है। भविष्य में यहाँ संवादों और प्रवचनों का संपादित संग्रह प्रस्तुत किया जा सकता है।
हमारा संकल्प जानेंइस पृष्ठ पर संतों के विचारों का सरल भावार्थ दिया गया है, उनके नाम से शब्दशः उद्धरण नहीं। जहाँ मूल श्लोक उद्धृत है, वहाँ ग्रंथ और संदर्भ दिए गए हैं।
भविष्य में विद्वानों से संवाद, प्रवचन-परिचय, शास्त्रीय चर्चा और लोककल्याण से जुड़े विषयों का संपादित संग्रह यहाँ जोड़ा जा सकता है।
सामग्री साझा करने की सुविधा अभी सक्रिय नहीं है। आगे संपादकीय संपर्क व्यवस्था स्थापित होने पर योगदान प्रक्रिया जोड़ी जा सकती है।