
स्थापत्य ✦ ओडिशा · 13वीं शताब्दी
कोणार्क सूर्य मंदिर
पूर्वी गंग वंश के काल में निर्मित यह मंदिर पत्थर में गढ़ी सूर्य के रथ की अद्भुत कल्पना का परिचायक है।
मंदिरों का स्थापत्य, ग्रंथों की अंतर्दृष्टि, उत्सवों की रंगत और विविध परंपराएँ—हमारी संस्कृति का हर अध्याय अद्वितीय है।
॥ सत्यम् शिवम् सुन्दरम् ॥ये चार स्थल भारतीय कला, विश्वास और शिल्प-परंपरा की उत्कृष्ट झलक प्रस्तुत करते हैं।

पूर्वी गंग वंश के काल में निर्मित यह मंदिर पत्थर में गढ़ी सूर्य के रथ की अद्भुत कल्पना का परिचायक है।

तुंगभद्रा के निकट हम्पी की स्मारक-शृंखला में स्थित यह मंदिर आज भी सक्रिय उपासना से जुड़ा है।

राजराज चोल प्रथम के समय निर्मित यह शिव मंदिर द्रविड़ स्थापत्य, भव्यता और कलात्मक दक्षता का उदाहरण है।

चंदेल शासकों की कला-परंपरा को दर्शाते मंदिरों का समूह अपने सूक्ष्म शिल्प और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है।
वेद, उपनिषद, गीता और दर्शन की विचार-परंपरा।
ऋतुओं, प्रकृति और सामाजिक एकता से जुड़ी लोकपरंपराएँ।
मंदिर, मूर्तिकला, संगीत और नृत्य की सृजनशील धारा।